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mahabharat 8.85.25-26h: महायुद्ध में सहस्रों बाणों से सुसज्जित महाबली अर्जुन को अपनी ओर आते देख कर्णपुत्र वृषसेन उनकी ओर उसी प्रकार दौड़ा, जैसे नमुचि ने देवताओं के राजा इन्द्र पर आक्रमण किया था।   |   mahabharat अध्याय 8.85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.85.25-26h 
तमापतन्तं नरवीरमुग्रं
महाहवे बाणसहस्रधारिणम्॥ २५॥
अभ्यापतत् कर्णसुतो महारथं
यथा महेन्द्रं नमुचि: पुरा तथा।
 
 
अनुवाद
महायुद्ध में सहस्रों बाणों से सुसज्जित महाबली अर्जुन को अपनी ओर आते देख कर्णपुत्र वृषसेन उनकी ओर उसी प्रकार दौड़ा, जैसे नमुचि ने देवताओं के राजा इन्द्र पर आक्रमण किया था।
 
In the great war, seeing the fierce warrior Arjuna, armed with thousands of arrows, coming towards him, Vrishasena, the son of Karna, ran towards him in the same manner as Namuchi had attacked Indra, the king of the gods. 25 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)