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mahabharat 8.85.22: तत्पश्चात् कर्णपुत्र वृषसेन ने तीन लोहे के बाणों से शतानीक को घायल कर दिया, फिर तीन बाणों से अर्जुन को, तीन बाणों से भीमसेन को, सात बाणों से नकुल को तथा बारह बाणों से श्रीकृष्ण को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.85.22 
तत: शतानीकमविध्यदायसै-
स्त्रिभि: शरै: कर्णसुतोऽर्जुनं त्रिभि:।
त्रिभिश्च भीमं नकुलं च सप्तभि-
र्जनार्दनं द्वादशभिश्च सायकै:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कर्णपुत्र वृषसेन ने तीन लोहे के बाणों से शतानीक को घायल कर दिया, फिर तीन बाणों से अर्जुन को, तीन बाणों से भीमसेन को, सात बाणों से नकुल को तथा बारह बाणों से श्रीकृष्ण को घायल कर दिया।
 
Thereafter, Karna's son Vrishasena wounded Shatanika with three arrows made of iron. Then he pierced Arjuna with three arrows, Bhimasena with three arrows, Nakul with seven arrows and Shri Krishna with twelve arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)