श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.85.19 
विषाणगात्रावरयोधपातिना
गजेन हन्तुं शकुनिं कुलिन्दज:।
जगाम वेगेन भृशार्दयंश्च तं
ततोऽस्य गान्धारपति: शिरोऽहरत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कुलिन्द के दूसरे राजकुमार ने अपने दाँतों, शरीर और सूँड़ से बड़े-बड़े योद्धाओं को भी मार डालने में समर्थ हाथी के द्वारा शकुनि पर आक्रमण करके उसे अत्यन्त घायल कर दिया। तत्पश्चात् गान्धारराज शकुनि ने उसका सिर काट डाला॥19॥
 
Thereafter the other prince of Kulinda attacked Shakuni with the help of an elephant capable of killing even the greatest warriors with its teeth, body and trunk and injured him very badly. Then Shakuni, the king of Gandharas, beheaded him.॥19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas