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mahabharat 8.85.15: अब कुलिंदराज ने दूसरा हाथी आगे बढ़ाया। उसने क्रथ के सारथि, घोड़ों और रथ को कुचल डाला, किन्तु क्रथ के बाणों से घायल होकर वह हाथी अपने स्वामी सहित वज्र से घायल पर्वत के समान गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 8.85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.85.15 
कुलिन्दपुत्रप्रहितोऽपरो द्विप:
क्राथस्य सूताश्वरथं व्यपोथयत् ।
ततोऽपतत् क्राथशराभिघातित:
सहेश्वरो वज्रहतो यथा गिरि:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अब कुलिंदराज ने दूसरा हाथी आगे बढ़ाया। उसने क्रथ के सारथि, घोड़ों और रथ को कुचल डाला, किन्तु क्रथ के बाणों से घायल होकर वह हाथी अपने स्वामी सहित वज्र से घायल पर्वत के समान गिर पड़ा।
 
Now the prince of Kulinda brought forward the second elephant. It crushed Kratha's charioteer, horses and chariot, but the elephant, struck by Kratha's arrows, fell down along with its master like a mountain struck by thunderbolts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)