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mahabharat 8.85.14: जैसे वर्षा ऋतु में इन्द्र के वज्र से आहत होकर गेरूका पर्वत लाल जल छोड़ता है, उसी प्रकार वह हाथी अपने शरीर से बहुत-सा रक्त बहाता हुआ कुलिन्दराज के साथ नीचे गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 8.85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.85.14 
स नागराज: सह राजसूनुना
पपात रक्तं बहु सर्वत: क्षरन्।
महेन्द्रवज्रप्रहतोऽम्बुदागमे
यथा जलं गैरिकपर्वतस्तथा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जैसे वर्षा ऋतु में इन्द्र के वज्र से आहत होकर गेरूका पर्वत लाल जल छोड़ता है, उसी प्रकार वह हाथी अपने शरीर से बहुत-सा रक्त बहाता हुआ कुलिन्दराज के साथ नीचे गिर पड़ा।
 
Just as the Geruka mountain, struck by Indra's thunderbolt during the rainy season, sheds red water, similarly that elephant, shedding a lot of blood all over its body, fell down along with the prince of Kulinda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)