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mahabharat 8.85.10: जैसे बिजली की चमक और गर्जना से युक्त बादल प्रचण्ड वायु से टकराकर सब ओर से गिर पड़ते हैं, उसी प्रकार वे वीर योद्धा रथ, घोड़े, हाथी और पैदल सेना से मारे जाकर गिरने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  8.85.10 
रथाश्वमातङ्गपदातिभिस्तत:
परस्परं विप्रहतापतन् क्षितौ।
यथा सविद्युत् स्तनिता बलाहका:
समाहता दिग्भ्य इवोग्रमारुतै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जैसे बिजली की चमक और गर्जना से युक्त बादल प्रचण्ड वायु से टकराकर सब ओर से गिर पड़ते हैं, उसी प्रकार वे वीर योद्धा रथ, घोड़े, हाथी और पैदल सेना से मारे जाकर गिरने लगे।
 
Just as clouds, with flashes of lightning and roaring thunder, are lashed by a fierce wind and fall from all directions, similarly those warlike warriors began to fall down, being struck by chariots, horses, elephants and infantry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)