श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  8.85.1-2 
संजय उवाच
नकुलमथ विदित्वा छिन्नबाणासनासिं
विरथमरिशरार्तं कर्णपुत्रास्त्रभग्नम्।
पवनधुतपताकाह्लादिनो वल्गिताश्वा
वरपुरुषनियुक्तास्ते रथै: शीघ्रमीयु:॥ १॥
द्रुपदसुतवरिष्ठा: पञ्च शैनेयषष्ठा
द्रुपददुहितृपुत्रा: पञ्च चामित्रसाहा:।
द्विरदरथनराश्वान् सूदयन्तस्त्वदीयान्
भुजगपतिनिकाशैर्मार्गणैरात्तशस्त्रा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं—हे राजन! यह जानकर कि वृषसेन ने नकुल का धनुष और तलवार काट दी है, वह रथहीन हो गया है, शत्रुओं के बाणों से पीड़ित हो रहा है और कर्णपुत्र ने उसे अपने अस्त्रों से परास्त कर दिया है, महापुरुष भीमसेन की आज्ञा से द्रुपद के पाँच श्रेष्ठ पुत्र, छठे सात्यकि और द्रौपदी के पाँच पुत्र, जो शस्त्र लेकर शत्रुओं का सामना करने में समर्थ हैं, ये ग्यारह वीर योद्धा अपने रथों पर सवार होकर शीघ्रतापूर्वक वहाँ पहुँचे और आपके पक्ष के हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सैनिकों को अपने सर्परूपी बाणों से मार डाला। उस समय उनके रथों की ध्वजाएँ वायु के वेग से फड़फड़ा रही थीं। उनके घोड़े उछलते हुए आ रहे थे और वे सब-के-सब बड़े जोर से गर्जना कर रहे थे॥1-2॥
 
Sanjaya says—O King! Knowing that Vrishasena has cut off Nakula's bow and sword, he has become chariotless, is suffering from the enemy's arrows and that Karna's son has defeated him with his weapons, on the orders of the great man Bhimasena, the five best sons of Drupada, the sixth Satyaki and the five sons of Draupadi, who are capable of facing the enemies with weapons in their hands, these eleven brave warriors, reached there quickly in their chariots, killing your side's elephants, horses, chariots and infantry with their snake-like arrows. At that time the banners of their chariots were fluttering with the speed of the wind. Their horses were coming jumping and all of them were roaring loudly.॥1-2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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