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mahabharat 8.84.5-6h: कुन्तीकुमार भीम ने सुवर्णमय पंखों वाले और सुवर्णमय अंगों से विभूषित दस महान वेगशाली वृषभों की सहायता से उन दस भरतवंशी राजकुमारों को यमलोक भेज दिया॥5 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  8.84.5-6h 
तांस्तु भल्लैर्महावेगैर्दशभिर्दश भारतान्॥ ५॥
रुक्माङ्गदान् रुक्मपुङ्खै: पार्थो निन्ये यमक्षयम्।
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार भीम ने सुवर्णमय पंखों वाले और सुवर्णमय अंगों से विभूषित दस महान वेगशाली वृषभों की सहायता से उन दस भरतवंशी राजकुमारों को यमलोक भेज दिया॥5 1/2॥
 
Kuntikumar Bhima, with the help of ten great swift bulls with golden wings and adorned with golden limbs, sent those ten princes of Bharatvanshi to Yamaloka. 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)