Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.84.31-32: नकुल अपने बाणों को व्यर्थ करते हुए विचित्र प्रकार से विचरण करने लगे (युद्ध की अद्भुत चाल दिखाने लगे)। हे प्रभु! विचित्र तलवारों की चाल दिखाते हुए शीघ्रता से चलने वाले नकुल की सहस्त्र नक्षत्रों के चिह्न वाली ढाल को उस महासमर में कर्णपुत्र ने अपने विशाल बाणों से नष्ट कर दिया। | mahabharat अध्याय 8.84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नकुल अपने बाणों को व्यर्थ करते हुए विचित्र प्रकार से विचरण करने लगे (युद्ध की अद्भुत चाल दिखाने लगे)। हे प्रभु! विचित्र तलवारों की चाल दिखाते हुए शीघ्रता से चलने वाले नकुल की सहस्त्र नक्षत्रों के चिह्न वाली ढाल को उस महासमर में कर्णपुत्र ने अपने विशाल बाणों से नष्ट कर दिया।
Nakula, wasting his arrows, started moving in strange ways (started showing amazing tactics of war). O Lord! The shield bearing the mark of a thousand stars of Nakula, who was moving swiftly while showing strange sword movements, was destroyed by Karna's son with his huge arrows in that great war.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥