Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.84.27: वृषसेन ने आक्रमण कर रहे नकुल के पास पहुँचकर उसे चारों ओर से बाणों से बींध डाला। बाणों से घायल नकुल अत्यन्त क्रोधित हो उठे और स्वयं घायल होकर उन्होंने वीर वृषसेन को भी घायल कर दिया। | mahabharat अध्याय 8.84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमापतन्तं नकुलं सोऽभिपत्य
समन्तत: सायकै: प्रत्यविद्धॺत्।
स तुद्यमानो नकुल: पृषत्कै-
र्विव्याध वीरं स चुकोप विद्ध:॥ २७॥
अनुवाद
वृषसेन ने आक्रमण कर रहे नकुल के पास पहुँचकर उसे चारों ओर से बाणों से बींध डाला। बाणों से घायल नकुल अत्यन्त क्रोधित हो उठे और स्वयं घायल होकर उन्होंने वीर वृषसेन को भी घायल कर दिया।
Reaching Nakula who was attacking him, Vrishasena pierced him from all sides with his arrows. Nakula, who was hit by the arrows, became very angry and being himself wounded he pierced the brave Vrishasena also.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥