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श्लोक 8.84.21  |
अथान्यदादाय धनु: स शीघ्रं
कर्णात्मज: पाण्डवमभ्यविध्यत्।
दिव्यैरस्त्रैरभ्यवर्षच्च सोऽपि
कर्णस्य पुत्रो नकुलं कृतास्त्र:॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| तब कर्णपुत्र वृषसेन ने तत्काल दूसरा धनुष हाथ में लेकर पाण्डुकुमार नकुल को बींध डाला। कर्णपुत्र अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता था, अतः उसने नकुल पर दिव्यास्त्रों की वर्षा आरम्भ कर दी। 21॥ |
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| Then Karna's son Vrishasena immediately took the second bow in his hand and pierced Pandukumar Nakul. Karna's son was knowledgeable about weapons, hence he started showering divine weapons on Nakul. 21॥ |
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