Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.84.19: यह देखकर महारथी नकुल ने युद्धस्थल में बड़े हर्ष से युद्ध कर रहे अपने शत्रु कर्णपुत्र वृषसेन पर बाणों से आक्रमण करके उसे उसी प्रकार पीड़ित कर दिया, जैसे पूर्वकाल में इन्द्र ने जम्भ नामक दैत्य पर आक्रमण किया था।   |   mahabharat अध्याय 8.84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.84.19 
तमभ्यधावन्नकुल: प्रवीरो
रोषादमित्रं प्रदुदन् पृषत्कै:।
कर्णस्य पुत्रं समरे प्रहृष्टं
पुरा जिघांसुर्मघवेव जम्भम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर महारथी नकुल ने युद्धस्थल में बड़े हर्ष से युद्ध कर रहे अपने शत्रु कर्णपुत्र वृषसेन पर बाणों से आक्रमण करके उसे उसी प्रकार पीड़ित कर दिया, जैसे पूर्वकाल में इन्द्र ने जम्भ नामक दैत्य पर आक्रमण किया था।
 
Seeing this, the chief warrior Nakula attacked his enemy Vrishasena, son of Karna, who was fighting with great joy in the battlefield, afflicting him with arrows, in the same manner as Indra had attacked the demon named Jambha in the past.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)