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mahabharat 8.84.18: तत्पश्चात् वृषसेन ने क्रोध में भरकर पाण्डुपुत्र भीमसेन पर, जो आपके सामने खड़े होकर आपके सैनिकों के साथ युद्ध कर रहे थे, हाथ में गदा लिये हुए, मानो कालराज हो, आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 8.84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.84.18 
तत: क्रुद्धो वृषसेनोऽभ्यधाव-
दवस्थितं प्रमुखे पाण्डवं तम्।
वृकोदरं कालमिवात्तदण्डं
गदाहस्तं योधयन्तं त्वदीयान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वृषसेन ने क्रोध में भरकर पाण्डुपुत्र भीमसेन पर, जो आपके सामने खड़े होकर आपके सैनिकों के साथ युद्ध कर रहे थे, हाथ में गदा लिये हुए, मानो कालराज हो, आक्रमण किया।
 
Thereupon, Vrishasena, filled with rage, attacked Bhimasena, the son of Pandu, who was standing before you, fighting with your soldiers, with a mace in his hand, like the wielding Kala (King of a rod).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)