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mahabharat 8.84.17: अत्यन्त तेजस्वी शल्य के ये वचन सुनकर कर्ण के हृदय में युद्ध के लिए आवश्यक भावनाएँ (उत्साह, क्रोध आदि) दृढ़ हो गईं॥17॥   |   mahabharat अध्याय 8.84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.84.17 
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं शल्यस्यामिततेजस:।
हृदि चावश्यकं भावं चक्रे युद्धाय सुस्थिरम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अत्यन्त तेजस्वी शल्य के ये वचन सुनकर कर्ण के हृदय में युद्ध के लिए आवश्यक भावनाएँ (उत्साह, क्रोध आदि) दृढ़ हो गईं॥17॥
 
On hearing these words of the extremely radiant Shalya, Karna strengthened in his heart the emotions (enthusiasm, anger, etc.) necessary for the war.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)