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mahabharat 8.84.1-2h: संजय कहते हैं - हे राजन! दु:शासन के मारे जाने पर आपके दस महारथी, अत्यंत पराक्रमी एवं वीर पुत्र, जो युद्ध में कभी पीठ नहीं दिखाते थे तथा महान क्रोध के विष से भरे हुए थे, उन्होंने आकर भीमसेन को अपने बाणों से ढक दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध  »  श्लोक 1-2h
 
 
श्लोक  8.84.1-2h 
संजय उवाच
दु:शासने तु निहते तव पुत्रा महारथा:।
महाक्रोधविषा वीरा: समरेष्वपलायिन:॥ १॥
दश राजन् महावीर्या भीमं प्राच्छादयन् शरै:।
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! दु:शासन के मारे जाने पर आपके दस महारथी, अत्यंत पराक्रमी एवं वीर पुत्र, जो युद्ध में कभी पीठ नहीं दिखाते थे तथा महान क्रोध के विष से भरे हुए थे, उन्होंने आकर भीमसेन को अपने बाणों से ढक दिया।
 
Sanjaya says - O King! After the death of Dushasan, your ten great warriors, extremely valiant and valiant sons, who never turned their back in the war and were filled with the venom of great anger, came and covered Bhimasena with their arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)