श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.83.6 
विद्धोऽस्मि वीराशु भृशं त्वयाद्य
सहस्व भूयोऽपि गदाप्रहारम्।
उक्त्वैवमुच्चै: कुपितोऽथ भीमो
जग्राह तां भीमगदां वधाय॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उसने कहा, ‘वीर! आज तुमने इतनी तेजी से बाण चलाकर मुझे बहुत घायल कर दिया है; अब तुम स्वयं मेरी गदा का प्रहार सह लो।’ ऐसा ऊँचे स्वर में कहकर भीमसेन क्रोधित हो गये और उन्होंने दु:शासन को मारने के लिए हाथ में एक भयंकर गदा उठा ली।
 
And he said, 'Valiant one! Today you have wounded me very badly by shooting an arrow with such speed; but now bear the blow of my mace yourself.' Having said this in a loud voice, Bhimasena became angry and took up a terrible mace in his hand to kill Dushasan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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