श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  8.83.52 
एतावदुक्त्वा वचनं प्रहृष्टो
ननाद चोच्चै रुधिरार्द्रगात्र:।
ननर्द चैवातिबलो महात्मा
वृत्रं निहत्येव सहस्रनेत्र:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर रक्त से भीगे हुए शरीर वाले अत्यन्त बलशाली भीमसेन वृत्रासुर को मारकर हजार नेत्रों वाले इन्द्र के समान गर्जना करते हुए बड़े जोर से गर्जना करने लगे।
 
Having said this, the extremely powerful Bhima, whose body was drenched in blood, after killing Vritrasura, started roaring loudly and roaring like the thousand-eyed Indra.
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि दु:शासनवधे त्र्यशीतितमोऽध्याय:॥ ८३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें दु:शासनवधविषयक तिरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)