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mahabharat 8.83.51: यहाँ मैं दूसरे यज्ञपशु दुर्योधन को टुकड़े-टुकड़े करके बलि चढ़ा दूँगा और समस्त कौरवों के देखते-देखते उस दुष्टात्मा का सिर अपने पैरों से कुचलकर शांति प्राप्त करूँगा।’ ॥51॥   |   mahabharat अध्याय 8.83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  8.83.51 
अत्रैव दास्याम्यपरं द्वितीयं
दुर्योधनं यज्ञपशुं विशस्य।
शिरो मृदित्वा च पदा दुरात्मन:
शान्तिं लप्स्ये कौरवाणां समक्षम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
यहाँ मैं दूसरे यज्ञपशु दुर्योधन को टुकड़े-टुकड़े करके बलि चढ़ा दूँगा और समस्त कौरवों के देखते-देखते उस दुष्टात्मा का सिर अपने पैरों से कुचलकर शांति प्राप्त करूँगा।’ ॥51॥
 
Here I will sacrifice the other sacrificial animal, Duryodhana, by cutting him into pieces and in front of the eyes of all the Kauravas I will attain peace by crushing the head of that evil soul with my feet.' ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)