श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  8.83.49-50 
इत्युक्त्वा वचनं राजन् जयं प्राप्य वृकोदर:।
पुनराह महाराज स्मयंस्तौ केशवार्जुनौ॥ ४९॥
असृग्दिग्धो विस्रवल्लोहितास्य:
क्रुद्धोऽत्यर्थं भीमसेनस्तरस्वी।
दु:शासने यद् रणे संश्रुतं मे
तद् वै सत्यं कृतमद्येह वीरौ॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ऐसा कहकर रक्त से लथपथ तथा रक्त से लाल मुखवाले भयंकर एवं क्रोधी भीमसेन ने युद्ध में विजय पाकर श्रीकृष्ण और अर्जुन से मुस्कुराते हुए कहा - 'वीरों! मैंने दु:शासन के विषय में जो प्रतिज्ञा की थी, उसे आज यहाँ युद्धभूमि में सत्य सिद्ध कर दिखाया है।
 
Maharaj! After saying this, the fierce and furious Bhimasena, whose face was soaked in blood and was red with blood, after getting victory in the battle, smilingly said to Shri Krishna and Arjuna - 'Heroes! The promise that I had made regarding Dushasan, I have proved it true today here on the battlefield.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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