श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  8.83.41-42h 
भीमोऽपि हत्वा तत्रैव दु:शासनममर्षणम्।
पूरयित्वाञ्जलं भूयो रुधिरस्योग्रनि:स्वन:॥ ४१॥
शृण्वतां लोकवीराणामिदं वचनमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
भीमसेन ने क्रोध में भरकर दु:शासन को वहीं मार डाला और फिर उसके रक्त से अपने हाथ भरकर भयंकर गर्जना की और विश्वविख्यात योद्धाओं को सुनाते हुए इस प्रकार बोले-॥41 1/2॥
 
Bhimasena, filled with anger, killed Dushasan there and then filled his hands with his blood and roared horribly and while being heard by the world-renowned warriors, spoke thus -॥ 41 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas