श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.83.35 
तं तत्र भीमं ददृशु: समन्ताद्
दौ:शासनं तद् रुधिरं पिबन्तम्।
सर्वेऽपलायन्त भयाभिपन्ना
न वै मनुष्योऽयमिति ब्रुवाणा:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जिन लोगों ने भीमसेन को दु:शासन का रक्त पीते देखा, वे भयभीत हो गए और ‘यह मनुष्य नहीं, राक्षस है!’ ऐसा कहते हुए सब दिशाओं में भागने लगे॥35॥
 
Those who saw Bhimasena drinking the blood of Dushasan became frightened and started running in all directions saying, 'This is not a human being but a demon!'॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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