Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.83.34: जो लोग डरे हुए नहीं थे, उनके भी हथियार छूट गए। वे डर के मारे धीमी आवाज़ में मदद के लिए पुकारने लगे और आँखें बंद करके इधर-उधर देखने लगे। 34. | mahabharat अध्याय 8.83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्गार । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये चापि नासन् व्यथिता मनुष्या-
स्तेषां करेभ्य: पतितं हि शस्त्रम्।
भयाच्च संचुक्रुशुरस्वरैस्ते
निमीलिताक्षा ददृशु: समन्तत:॥ ३४॥
अनुवाद
जो लोग डरे हुए नहीं थे, उनके भी हथियार छूट गए। वे डर के मारे धीमी आवाज़ में मदद के लिए पुकारने लगे और आँखें बंद करके इधर-उधर देखने लगे। 34.
Even those who were not overcome with fear dropped their weapons from their hands. Out of fear, they started calling for helpers in a low voice and started looking around with their eyes partially closed. 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥