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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  8.83.33 
एवं ब्रुवाणं पुनराद्रवन्त-
मास्वाद्य रक्तं तमतिप्रहृष्टम्।
ये भीमसेनं ददृशुस्तदानीं
भयेन तेऽपि व्यथिता निपेतु:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर वह अत्यन्त प्रसन्न हुआ और बार-बार उछलने और रक्त का स्वाद लेने लगा। उस समय जो लोग भीमसेन की ओर देखते थे, वे भी भय के मारे भूमि पर गिर पड़ते थे।
 
Saying this, he became very happy and started jumping and tasting the blood again and again. At that time, those who looked at Bhimasena also fell down on the ground in fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)