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mahabharat 8.83.32: तत्पश्चात् भयंकर कर्म करने वाले भीमसेन ने दु:शासन को मृत देखकर क्रोध से व्याकुल होकर जोर से हंसकर कहा, "मैं क्या कर सकता हूँ? मृत्यु ने ही तुम्हें इस दुःखद भाग्य से बचा लिया है।"   |   mahabharat अध्याय 8.83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.83.32 
अथाह भीम: पुनरुग्रकर्मा
दु:शासनं क्रोधपरीतचेता:।
गतासुमालोक्य विहस्य सुस्वरं
किं वा कुर्यां मृत्युना रक्षितोऽसि॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भयंकर कर्म करने वाले भीमसेन ने दु:शासन को मृत देखकर क्रोध से व्याकुल होकर जोर से हंसकर कहा, "मैं क्या कर सकता हूँ? मृत्यु ने ही तुम्हें इस दुःखद भाग्य से बचा लिया है।"
 
Thereafter, Bhimasena, who was capable of terrible deeds, being distraught with anger, on seeing Dushasan lifeless, laughed loudly and said, "What can I do? Death has saved you from this miserable fate."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)