| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्गार » श्लोक 23-24 |
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| | | | श्लोक 8.83.23-24  | अयं करिकराकार: पीनस्तनविमर्दन:।
गोसहस्रप्रदाता च क्षत्रियान्तकर: कर:॥ २३॥
अनेन याज्ञसेन्या मे भीम केशा विकर्षिता:।
पश्यतां कुरुमुख्यानां युष्माकं च सभासदाम्॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘यह मेरा हाथ है, जो हाथी की सूँड़ के समान मोटा है, जो स्त्रियों के ऊँचे स्तनों को सहलाने, सहस्रों गौओं का दान करने तथा क्षत्रियों का नाश करने में समर्थ है। भीमसेन! इसी हाथ से मैंने कुरुवंश के समस्त श्रेष्ठ पुरुषों तथा सभा में बैठे हुए आप सब लोगों के सामने द्रौपदी के केश खींचे थे।’॥23-24॥ | | | | ‘This is my hand, as thick as an elephant's trunk, which is capable of caressing the high breasts of women, of donating thousands of cows and of destroying Kshatriyas. Bhimsena! With this very hand, I pulled the hair of Draupadi in front of all the best men of the Kuru clan and you all sitting in the court.'॥ 23-24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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