श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  8.83.21-22 
श्रुत्वा तु तद् भीमवच: सुघोरं
दु:शासनो भीमसेनं निरीक्ष्य॥ २१॥
जज्वाल भीमं स तदा स्मयेन
संशृण्वतां कौरवसोमकानाम्।
उक्तस्तदाऽऽजौ स तथा सरोषं
जगाद भीमं परिवर्तनेत्र:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन का यह अत्यन्त भयंकर वचन सुनकर दु:शासन ने उसकी ओर देखा। उसे देखते ही वह क्रोध से भर गया। युद्धभूमि में ऐसा कहने पर उसकी भृकुटि बदल गई थी; अतएव समस्त कौरवों और सोमकों के सुनते हुए भी वह क्रोधपूर्वक मुस्कुराकर बोला -॥ 21-22॥
 
Hearing this extremely horrific statement of Bhimasena, Dushasan looked at him. As soon as he saw him, he was filled with anger. His frown had changed when he had said so on the battlefield; hence, while all the Kauravas and Somakas were listening, he smiled and spoke angrily -॥ 21-22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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