|
| |
| |
श्लोक 8.83.2  |
स तत् कृत्वा राजपुत्रस्तरस्वी
विव्याध भीमं नवभि: पृषत्कै:।
ततोऽभिनद् बहुभि: क्षिप्रमेव
वरेषुभिर्भीमसेनं महात्मा॥ २॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| ऐसा करके उस तेजस्वी राजकुमार ने भीमसेन पर नौ बाणों से आक्रमण किया। तत्पश्चात् महाबली दु:शासन ने बड़ी फुर्ती से अनेक उत्तम बाणों द्वारा भीमसेन को भली-भाँति घायल कर दिया॥2॥ |
| |
| Having done this, the dashing prince attacked Bhimasena with nine arrows. After this, the great Dushasan with great agility pierced Bhimasena thoroughly with many excellent arrows.॥2॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|