|
| |
| |
श्लोक 8.83.13  |
भीमोऽपि वेगादवतीर्य यानाद्
दु:शासनं वेगवानभ्यधावत्।
तत: स्मृत्वा भीमसेनस्तरस्वी
सापत्नकं यत् प्रयुक्तं सुतैस्ते॥ १३॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| तब भीमसेन भी तुरन्त रथ से उतरकर बड़े वेग से दु:शासन की ओर दौड़े। उस समय उतावले भीमसेन को आपके पुत्रों द्वारा किया गया शत्रुतापूर्ण व्यवहार याद आने लगा॥ 13॥ |
| |
| Then Bhimasena too quickly got down from the chariot and ran towards Dushasan with great speed. At that time the impetuous Bhimasena started remembering the hostility shown by your sons.॥ 13॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|