श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.83.11 
हया: ससूता निहता नरेन्द्र
चूर्णीकृतश्चास्य रथ: पतन्त्या।
दु:शासनं पाण्डवा: प्रेक्ष्य सर्वे
हृष्टा: पञ्चाला: सिंहनादानमुञ्चन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! उस गदा के गिरते ही दुःशासन का रथ चकनाचूर हो गया और सारथि तथा उसके घोड़े भी मारे गए। दुःशासन को उस दशा में देखकर सभी पाण्डव और पांचाल योद्धा हर्ष से भर गए और गर्जना करने लगे।
 
Narendra! As soon as that mace fell, it shattered Dushasan's chariot and killed the charioteer and his horses as well. Seeing Dushasan in that condition, all the Pandavas and Panchala warriors were filled with joy and started roaring.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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