श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध  »  श्लोक d5-d6
 
 
श्लोक  8.82.d5-d6 
दु:शासन उवाच
सर्वं स्मरे नैव च विस्मरामि
उदीर्यमाणं शृणु भीमसेन॥
स्मरामि चात्मप्रभवं चिराय
यज्जातुषे वेश्मनि रात्र्यहानि।
विश्वासहीना मृगयां चरन्तो
वसन्ति सर्वत्र निराकृतास्तु॥
 
 
अनुवाद
दु:शासन बोला- भीमसेन! मुझे सब कुछ याद है। मैं भूलता नहीं। मेरी बात सुनो। मैं जो कुछ कहता हूँ, वह मुझे बहुत समय तक याद रहता है। पहले तुम लोग दिन-रात लाक्षागृह में आशंकित रहते थे। फिर तुम्हें वहाँ से निकाल दिया गया और तुम जंगल में जगह-जगह शिकार करते हुए रहने लगे।
 
Dushasan said- Bhimsen! I remember everything. I do not forget. Listen to what I say. I remember everything I say for a long time. Earlier you people used to live in Lakshagriha day and night with apprehension. Then you were thrown out from there and started living in the forest hunting everywhere.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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