श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  8.82.d3 
भीम उवाच
दिष्टॺासि दु:शासन मेऽद्य दृष्ट:
ऋणं प्रतीच्छे सहवृद्धिमूलम्।
चिरोद्यतं यन्मया ते सभायां
कृष्णाभिमर्शेन गृहाण मत्त:॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले - दु:शासन! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि आज मैंने तुम्हारे दर्शन किये। कौरव सभा में द्रौपदी को छूने के कारण दीर्घकाल में जो तुम्हारा ऋण संचित हुआ है, उसे मैं ब्याज और मूलधन सहित चुकाना चाहता हूँ। कृपया वह सब मुझसे स्वीकार करो।
 
Bhimsen said - Dushasan! It is a matter of great fortune that I have seen you today. I want to repay the debt of you which has accumulated over a long period of time due to touching Draupadi in the Kaurava Sabha, including the interest and the principal. Please accept all that from me.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd