| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध » श्लोक d10h-33 |
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| | | | श्लोक 8.82.d10h-33  | संजय उवाच
(इत्येवमुक्तस्तु तवात्मजेन
पाण्डो: सुत: कोपवशं जगाम।)
तवात्मजस्याथ वृकोदरस्त्वरन्
धनु:क्षुराभ्यां ध्वजमेव चाच्छिनत् ।
ललाटमप्यस्य बिभेद पत्रिणा
शिरश्च कायात् प्रजहार सारथे:॥ ३३॥ | | | | | | अनुवाद | | संजय कहते हैं - हे राजन! आपके पुत्र की यह बात सुनकर पाण्डुपुत्र भीमसेन अत्यन्त क्रोध से भर गये। वृकोदर ने बड़ी शीघ्रता से दो छुरों से आपके पुत्र दु:शासन का धनुष और ध्वज काट डाला, एक बाण से उसके ललाट पर घाव कर दिया और दूसरे बाण से उसके सारथि का सिर धड़ से अलग कर दिया। | | | | Sanjaya says - O King! On hearing your son say this, Bhimasena, the son of Pandu, was overcome with anger. Vrikodara very hastily cut off the bow and flag of your son Dushasan with two razors, wounded him in the forehead with one arrow and severed the head of his charioteer from the body with the other. | | ✨ ai-generated | | |
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