श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.82.7 
पुत्रे हते क्रोधपरीतचेता:
कर्ण: शिनीनामृषभं जिघांसु:।
हतोऽसि शैनेय इति ब्रुवन् स
व्यवासृजद् बाणममित्रसाहम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अपने पुत्र की मृत्यु से क्रोधित कर्ण ने महायोद्धा सात्यकि को मारने वाला बाण चलाया और कहा, "सत्यके! अब तुम मर चुके हो।"
 
Karna, enraged at the death of his son, shot an arrow that would kill the great warrior Satyaki, and said, "Satyake! You are now dead."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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