Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.82.27: तदनन्तर शत्रुओं को परास्त करने वाले पूर्वोक्त पांचाल महारथी कवच धारण किए हुए रथों पर आरूढ़ होकर पुनः आए और युद्धस्थल में शनिप्रवर सात्यकि की उसी प्रकार रक्षा करने लगे, जैसे मरुद्गण शत्रुओं के उत्पीड़न के समय देवताओं के राजा इन्द्र की रक्षा करते हैं ॥27॥ | mahabharat अध्याय 8.82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदनन्तर शत्रुओं को परास्त करने वाले पूर्वोक्त पांचाल महारथी कवच धारण किए हुए रथों पर आरूढ़ होकर पुनः आए और युद्धस्थल में शनिप्रवर सात्यकि की उसी प्रकार रक्षा करने लगे, जैसे मरुद्गण शत्रुओं के उत्पीड़न के समय देवताओं के राजा इन्द्र की रक्षा करते हैं ॥27॥
Thereafter, the aforesaid Panchala Maharathi, who had defeated the enemies, mounted on the chariots wearing armor, came again and started protecting Shanipravara Satyaki in the battlefield in the same way as the king of gods protects Indra during the oppression of Marudgana enemies. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥