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श्लोक 8.82.24  |
तत: शिनीनामृषभ: शितै: शरै-
र्निकृत्य कर्णप्रहितानिषून् बहून्।
विदार्य कर्णं निशितैरयस्मयै-
स्तवात्मजं ज्येष्ठमविध्यदष्टभि:॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् शनिप्रवर सात्यकि ने अपने तीखे बाणों से कर्ण के चलाए हुए बहुत से बाणों को काट डाला और तीखे लोहे के बाणों से कर्ण को घायल करके आपके ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन को आठ बाणों से घायल कर दिया॥24॥ |
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| After that, Shani Pravara Satyaki cut many of the arrows shot by Karna with his sharp arrows and after wounding Karna with sharp iron arrows, he pierced your eldest son Duryodhana with eight arrows. 24॥ |
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