| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 8.82.22  | पराजिता: पञ्च महारथास्तु ते
महाहवे सूतसुतेन मारिष।
निरुद्यमास्तस्थुरमित्रनन्दना
यथेन्द्रियार्थात्मवता पराजिता:॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | आर्य! जिस प्रकार मन को वश में कर लेने वाले पुरुष द्वारा पराजित किये गये इन्द्रिय-विषय उसे आकर्षित नहीं करते, उसी प्रकार महायुद्ध में सारथिपुत्र द्वारा पराजित किये गये वे पाँचों पांचाल योद्धा निश्चल खड़े होकर अपने शत्रुओं का हर्ष बढ़ाने लगे। | | | | Arya! Just as the sense-objects which have been defeated by a person who has controlled his mind do not attract him, similarly, those five Panchala warriors who were defeated by the son of a charioteer in the great war, stood motionless and started increasing the joy of their enemies. | | ✨ ai-generated | | |
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