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mahabharat 8.82.20: इन्द्रधनुष के समान खींचे हुए विशाल गोलाकार धनुष से बाणों की वर्षा करते हुए अधिरथपुत्र कर्ण युद्धभूमि में किरणों से चमकते हुए सूर्य के समान शोभायमान हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.82.20 
स शक्रचापप्रतिमेन धन्वना
भृशायतेनाधिरथि: शरान् सृजन्।
बभौ रणे दीप्तमरीचिमण्डलो
यथांशुमाली परिवेषवांस्तथा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रधनुष के समान खींचे हुए विशाल गोलाकार धनुष से बाणों की वर्षा करते हुए अधिरथपुत्र कर्ण युद्धभूमि में किरणों से चमकते हुए सूर्य के समान शोभायमान हो रहा था।
 
Showering arrows from a huge circular bow drawn like a rainbow, Adhiratha's son Karna looked as beautiful on the battlefield as the Sun with its circumference shining with rays.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)