श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.82.19 
तस्यास्यतस्तानभिनिघ्नतश्च
ज्याबाणहस्तस्य धनु:स्वनेन।
साद्रिद्रुमा स्यात् पृथिवी विशीर्णे-
त्यतीव मत्वा जनता व्यषीदत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
कर्ण निरन्तर बाण चलाता और शत्रुओं का संहार करता रहता था। उसके हाथ में सदैव धनुष की डोरी और बाण रहते थे। यह सोचकर सब लोग अत्यन्त दुःखी थे कि उसके धनुष की टंकार से पर्वत और वृक्षों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी फट जाएगी॥19॥
 
Karna kept shooting arrows and killing his enemies. He always had a bowstring and arrows in his hand. Everyone was extremely saddened thinking that the entire earth, including mountains and trees, would be torn apart by the sound of his bow.॥19॥
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