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mahabharat 8.82.17: पांचाल रथियों में श्रेष्ठ इन पाँच वीर योद्धाओं ने वैकर्तन कर्ण पर आक्रमण किया, परन्तु उसे रथ से नीचे नहीं गिरा सके। जैसे मन को वश में कर लेने वाला योगी शब्द, स्पर्श आदि से विचलित नहीं हो सकता।   |   mahabharat अध्याय 8.82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.82.17 
ते पञ्च पाञ्चालरथप्रवीरा
वैकर्तनं कर्णमभिद्रवन्त:।
तस्माद् रथाच्चॺावयितुं न शेकु-
र्धैर्यात् कृतात्मानमिवेन्द्रियार्था:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पांचाल रथियों में श्रेष्ठ इन पाँच वीर योद्धाओं ने वैकर्तन कर्ण पर आक्रमण किया, परन्तु उसे रथ से नीचे नहीं गिरा सके। जैसे मन को वश में कर लेने वाला योगी शब्द, स्पर्श आदि से विचलित नहीं हो सकता।
 
These five brave warriors, the foremost among the Panchala charioteers, attacked Vaikartana Karna but could not throw him off the chariot. Just like a Yogi who has controlled his mind cannot be disturbed by things like sound, touch etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)