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mahabharat 8.82.12: उन्होंने अपने भयंकर रूप से घूमने वाले गाण्डीव धनुष को तानकर उसकी प्रत्यंचा से अपनी हथेली पर प्रहार किया और अचानक अपने बाणों से अन्धकार फैला दिया तथा शत्रुओं के हाथी, घोड़े, रथ और ध्वजाओं को नष्ट कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.82.12 
विस्फार्य गाण्डीवमथोग्रघोषं
ज्यया समाहत्य तले भृशं च।
बाणान्धकारं सहसैव कृत्वा
जघान नागाश्वरथध्वजांश्च॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने भयंकर रूप से घूमने वाले गाण्डीव धनुष को तानकर उसकी प्रत्यंचा से अपनी हथेली पर प्रहार किया और अचानक अपने बाणों से अन्धकार फैला दिया तथा शत्रुओं के हाथी, घोड़े, रथ और ध्वजाओं को नष्ट कर दिया।
 
Stretching out his terrifyingly twirling Gāṇḍīva bow, he struck his palm with its string and suddenly spread darkness with his arrows and destroyed the enemy's elephants, horses, chariots and flags.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)