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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.82.11 
तत: प्रहस्याशु नरप्रवीरो
रथं रथेनाधिरथेर्जगाम।
भये तेषां त्राणमिच्छन् सुबाहु-
रभ्याहतानां रथयूथपेन॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, सुन्दर भुजाओं वाले पराक्रमी अर्जुन मुस्कुराते हुए, भय के अवसर पर उन घायल सैनिकों की रक्षा करने के लिए रथसमूहों के सेनापति, विशाल रथ पर सवार होकर शीघ्रतापूर्वक सारथिपुत्र के रथ की ओर बढ़े॥11॥
 
Thereafter, the mighty Arjuna with beautiful arms, smiling, and in order to protect those wounded soldiers in an opportunity of fear, the commander of the chariot groups, advanced hastily in a huge chariot towards the chariot of the son of a charioteer. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)