श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.82.1 
संजय उवाच
तत: कर्ण: कुरुषु प्रद्रुतेषु
वरूथिना श्वेतहयेन राजन्।
पाञ्चालपुत्रान् व्यधमत् सूतपुत्रो
महेषुभिर्वात इवाभ्रसंघान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: जब कौरव सेना बड़े वेग से भागने लगी, तो जैसे वायु बादलों को छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार सारथीपुत्र कर्ण ने श्वेत घोड़ों से जुते हुए रथ पर धावा किया और अपने विशाल बाणों से पांचाल राजकुमारों का संहार करना आरम्भ कर दिया।
 
Sanjaya says: When the Kaurava army began to flee with great speed, just as the wind breaks up a cloud, in the same manner Karna, the son of a charioteer, attacked from a chariot drawn by white horses and began killing the princes of the Panchalas with his huge arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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