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mahabharat 8.81.d2-d3: हे भरतश्रेष्ठ! शत्रुओं को दग्ध करते हुए अर्जुन को सामने देखकर भी आपकी सेना तीखे बाणों से घायल होकर भी युद्ध से पीछे नहीं हटी। हे भारतभूषण! वहाँ हमने कौरव योद्धाओं का अद्भुत पराक्रम देखा कि मारे जाने पर भी वे अर्जुन को नहीं छोड़ रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम  »  श्लोक d2-d3
 
 
श्लोक  8.81.d2-d3 
(तत् सैन्यं भरतश्रेष्ठ वध्यमानं शितै: शरै:।
न जहौ समरं प्राप्य फाल्गुनं शत्रुतापनम्॥
तत्राद्भुतमपश्याम कौरवाणां पराक्रमम्।
वध्यमानापि यत् पार्थं न जहुर्भरतर्षभ॥ )
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! शत्रुओं को दग्ध करते हुए अर्जुन को सामने देखकर भी आपकी सेना तीखे बाणों से घायल होकर भी युद्ध से पीछे नहीं हटी। हे भारतभूषण! वहाँ हमने कौरव योद्धाओं का अद्भुत पराक्रम देखा कि मारे जाने पर भी वे अर्जुन को नहीं छोड़ रहे थे।
 
O best of the Bharatas! Seeing Arjuna, who was scorching the enemies, in front of them, your army did not leave the battle despite being hit by sharp arrows. O Bharat Bhushan! There we saw the amazing valour of the Kaurava warriors that even after being killed, they were not leaving Arjuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)