Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.81.49-50: माननीय महाराज! जैसे सभी प्राणी मृत्यु से डरकर धर्म का आश्रय लेते हैं, उसी प्रकार आपका पुत्र पाण्डुपुत्र अर्जुन के भय से महाधनुर्धर कर्ण के पीछे छिपने लगा था।।49-50॥   |   mahabharat अध्याय 8.81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  8.81.49-50 
यथा सर्वाणि भूतानि मृत्योर्भीतानि मारिष।
धर्ममेवोपलीयन्ते कर्मवन्ति हि यानि च॥ ४९॥
तथा कर्णं महेष्वासं पुत्रास्तव नराधिप।
उपालीयन्त संत्रासात् पाण्डवस्य महात्मन:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
माननीय महाराज! जैसे सभी प्राणी मृत्यु से डरकर धर्म का आश्रय लेते हैं, उसी प्रकार आपका पुत्र पाण्डुपुत्र अर्जुन के भय से महाधनुर्धर कर्ण के पीछे छिपने लगा था।।49-50॥
 
Honorable King! Just as all living beings fearing death and taking refuge in religion, fearing death, in the same way your son started hiding behind the great archer Karna due to fear of Pandu's son Arjuna. 49-50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)