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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  8.81.40 
हाहाकृतं भृशं त्रस्तं लीयमानं परस्परम्।
अलातचक्रवत् सैन्यं तदाभ्रमत तावकम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय आपकी सेना अत्यन्त भयभीत हो गई, अग्निचक्र के समान वहाँ चक्कर लगाने लगी, चिल्लाने लगी और एक दूसरे के पीछे छिपने लगी।
 
Maharaj! At that time your army became very frightened, started circling there like a wheel of fire, shouting and hiding behind each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)