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mahabharat 8.81.32: पाण्डवपुत्र भीमसेन अत्यन्त क्रोध में भरे हुए उन्मत्त हाथी के समान शत्रुओं की हाथी सेना में इस प्रकार घुस गये, मानो समुद्र में घुस गये हों।   |   mahabharat अध्याय 8.81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.81.32 
स मत्त इव मातङ्ग: संक्रुद्ध: पाण्डुनन्दन:।
प्रविवेश गजानीकं मकर: सागरं यथा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवपुत्र भीमसेन अत्यन्त क्रोध में भरे हुए उन्मत्त हाथी के समान शत्रुओं की हाथी सेना में इस प्रकार घुस गये, मानो समुद्र में घुस गये हों।
 
Like a mad elephant, filled with great anger, Bhimasena, son of Pandava, entered the elephant army of his enemies as if he had entered the ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)