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mahabharat 8.81.29: वह गदा, अविस्मरणीय कालरात्रि के समान, शत्रुओं के रक्त, मांस और चर्बी से तृप्त होकर उनकी हड्डियों को भी चबा रही थी।   |   mahabharat अध्याय 8.81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  8.81.29 
असृङ्मांसवसाभिश्च तृप्तिमभ्यागता गदा।
अस्थीन्यप्यश्नती तस्थौ कालरात्रीव दुर्दृशा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वह गदा, अविस्मरणीय कालरात्रि के समान, शत्रुओं के रक्त, मांस और चर्बी से तृप्त होकर उनकी हड्डियों को भी चबा रही थी।
 
That mace, like the unforgettable Kalaratri, being satiated with the blood, flesh and fat of the enemies, was chewing their bones as well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)