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mahabharat 8.81.28: घायल कौरव सैनिक रक्त से लथपथ होकर भूमि पर पड़े थे और दाँतों से अपने होंठ काट रहे थे। किसी के माथे टूटे हुए थे, किसी की हड्डियाँ चूर-चूर हो गई थीं और किसी के पैर टूट गए थे। वे सब के सब मांसाहारी पशुओं का आहार बन गए॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 8.81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.81.28 
दन्तैर्दशन्तो वसुधां शेरते क्षतजोक्षिता:।
भग्नमूर्धास्थिचरणा: क्रव्यादगणभोजना:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
घायल कौरव सैनिक रक्त से लथपथ होकर भूमि पर पड़े थे और दाँतों से अपने होंठ काट रहे थे। किसी के माथे टूटे हुए थे, किसी की हड्डियाँ चूर-चूर हो गई थीं और किसी के पैर टूट गए थे। वे सब के सब मांसाहारी पशुओं का आहार बन गए॥ 28॥
 
The wounded Kaurava soldiers were lying on the ground, bathed in blood and biting their lips with their teeth. Some had their foreheads broken, some had their bones shattered and some had their legs broken. All of them became food for carnivorous animals.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)