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mahabharat 8.80.31-32: शत्रुओं का संहार करने वाले अर्जुन ने सुवर्णमय पंख वाले तथा अत्यन्त वेगवान दस महावृक्षों की सहायता से सुवर्णमय अंगों से सुशोभित उन दस वीरों को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.80: अर्जुनका कौरव-सेनाको नष्ट करके आगे बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका कौरव-सेनाको नष्ट करके आगे बढ़ना  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  8.80.31-32 
तांस्तु भल्लैर्महावेगैर्दशभिर्दश भारत॥ ३१॥
रुक्माङ्गदान् रुक्मपुङ्खैर्हत्वा प्रायादमित्रहा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का संहार करने वाले अर्जुन ने सुवर्णमय पंख वाले तथा अत्यन्त वेगवान दस महावृक्षों की सहायता से सुवर्णमय अंगों से सुशोभित उन दस वीरों को घायल कर दिया।
 
India Arjuna, the slayer of enemies, pierced those ten brave men adorned with golden limbs with the help of ten great bulls with golden wings and great speed.
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि संकुलयुद्धेऽशीतितमोऽध्याय:॥ ८०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें संकुलयुद्धविषयक अस्सीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)