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mahabharat 8.80.24-25h: तब भीमसेन की अनुमति लेकर अर्जुन अपने रथ की ध्वनि से पृथ्वी और आकाश को गुंजायमान करते हुए वहाँ से चले गये।   |   mahabharat अध्याय 8.80: अर्जुनका कौरव-सेनाको नष्ट करके आगे बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका कौरव-सेनाको नष्ट करके आगे बढ़ना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  8.80.24-25h 
भीमसेनाभ्यनुज्ञातस्तत: प्रायाद् धनंजय:॥ २४॥
नादयन् रथघोषेण पृथिवीं द्यां च भारत।
 
 
अनुवाद
तब भीमसेन की अनुमति लेकर अर्जुन अपने रथ की ध्वनि से पृथ्वी और आकाश को गुंजायमान करते हुए वहाँ से चले गये।
 
Bhaarat! Then taking Bhimasena's permission, Arjuna left the place, making the earth and sky resound with the noise of his chariot. 24 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)